ग्वालियर। डिजिटल अरेस्ट के मामले में ग्वालियर की पीड़िता 71 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक आशा भटनागर ने ठगों के साथ समझौता कर लिया और इस आधार पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने हाल ही में उस मामले की एफआईआर निरस्त कर दी। महिला ने कोर्ट में कह दिया कि ठगों ने उनका पैसा वापस कर दिया है, इसलिए समझौता करना चाहती हैं।
स्वास्थ्य का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें हृदय की बीमारी है और बार-बार कोर्ट नहीं आ सकतीं। पीड़िता के समझौता करने के बाद कोर्ट की ओर से एफआईआर निरस्त होने से आरोपितों पर लगे आरोप खत्म हो गए हैं। हालांकि ऐसे अपराध को 'समाज के विरुद्ध अपराध' की श्रेणी में रखा जाता है।संगीन मामलों में नहीं होती समझौ
उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष 14 मार्च को डिजिटल अरेस्ट कर आशा भटनागर से ठगों ने 51 लाख रुपये अपने दो खातों में ट्रांसफर करा लिए थे। इस मामले में पुलिस ने 12 लोगों को आरोपित बनाया था। विधि विशेषज्ञों के अनुसार, कोर्ट में आने वाले कई मामले ऐसे होते हैं, जिन्हें दोनों पक्षों के बीच समझौते के आधार पर खत्म कर दिया जाता है, लेकिन कई ऐसे संगीन और समाज के विरुद्ध अपराध होते हैं, जिनमें समझौते की गुंजाइश नहीं होती है।